स्रोत-विकिपीडिया

छोटे से शहर से फ़िल्मनगरी आकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा से बॉलीवुड में डंका बजाने वाले अभिनेता आयुष्मान खुराना किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।

पिछले कुछ सालों से उन्होंने बधाई-हो, अंधाधुन, आर्टिकल-15, ड्रीम गर्ल, बाला और शुभ-मंगल ज़्यादा सावधान जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में शानदार काम किया। वह एक अभिनेता के अलावा एक अच्छे गायक भी हैं, जो अक़्सर फ़िल्मो में अभिनय के अलावा गीत भी गाते रहते हैं।

2012 में विकी डोनर से फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत करने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत यह अभिनेता पढ़ने लिख़ने के बड़े शौकीन हैं। अक़्सर वह अपनी कविताओं को अपने सोशल-मीडिया पर साझा करते रहते हैं।

ज्ञान के साधक आयुष्मान

हमेशा ख़ुद को बेहतर बनाने में लगे रहने वाले औऱ अलग तरह की फ़िल्म करने वाले आयुष्मान लॉकडाउन में भारतीय इतिहास को जानने समझने के लिए एक ऑनलाइन कोर्स भी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मैं हमेशा से ज्ञान का साधक रहा हूँ। मेरे पास ये जो ख़ाली वक्त है ,उसमें मैं अपने अतीत के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना चाहता हूँ। यह ख़ुद को परिपूर्ण करने वाला अनुभव होगा।

आयुष्मान के अभिनय औऱ गायकी की तो पूरी दुनिया क़ायल है पर वो उतना ही बेहतरीन लिखते हैं और शायद उनकी इस कला से हम उतना परिचित नहीं हैं, इसलिए हम उनकी कुछ कविता औऱ शायरी भी साझा कर रहे हैं।

कुछ दूर तक चलो, उस मोड़ तक ही                              जब वो मोड़ आएगा, तो मैं बताऊंगा नहीं!

यहाँ कोई मित्र नहीं है, कोई आश्वस्त चरित्र नहीं है
सब अर्धनिर्मित है
अर्धनिर्मित इमारतें हैं, अर्धनिर्मित बच्चों कि शरारतें हैं
अर्धनिर्मित ज़िन्दगी कि शर्ते हैं
अर्धनिर्मित जीवन पाने के लिए लोग रोज़ यहाँ मरते हैं
अर्धनिर्मित है यहाँ के प्रेमियों का प्यार
अर्धनिर्मित है यहाँ मनुष्यों के जीवन के आधार
आज का दिन अर्धनिर्मित है
न धूप है, न छावों है
मंजिल कि डगर से विपरीत चलते पाँव है
अर्धनिर्मित सी सेहत है
न कभी देखा निरोगी काया को, न कभी दिल से कहा अलविदा माया को
हमारी अर्धनिर्मित सी कहानी है, अर्धनिर्मित हमारे युवाओं कि जवानी है
हम रोज़ एक अर्धनिर्मित शय्या पर लेटे हुए एक अर्धनिर्मित सा सपना देखते हैं
उस सपने में हम अपनी अर्धनिर्मित आकांक्षाओं को आसमानों में फेंकते हैं
आसमान को भी इन आकांक्षाओं को समेटकर अर्धनिर्मित होने का एहसास होता होगा
क्योंकि यह आकांक्षाएं हमारी नहीं आसमान की है
बिलकुल वैसे ही जैसे यह अर्धनिर्मित गाथा तुम्हारी है और आयुष्मान की है!

अज्ञात से सवाल का
अज्ञात सा जवाब है
अज्ञात सी मेरी नींद में
अज्ञात सा इक ख़्वाब है
अज्ञात से महासागर में अज्ञात सा ही आब है
मेरी हैसियत कुछ भी नहीं कोई अज्ञात ही लाजवाब है!

●एक हसरत थी की कभी वो भी हमें मनाये,
पर ये कम्ब्ख़त दिल कभी उनसे रूठा ही नहीं!

सब उम्मीदों का भार है बस्ते में,
मंज़िलों से बेहतर खुमार है रस्ते में,
तेरी फ़ितरत है सूरज की,
ना जाना तूने कभी मेरे अंधेरे को !

मौन का अपना अलग मज़ा है,                                     कुछ कह के बात मत बिगाड़ो!

हाल में ही कोरोना-संकट पर लिखी गई आयुष्मान की  कविता को काफ़ी सराहा गया था। इनकी अगली फ़िल्म शुजीत सरकार की “गुलाबो-सिताबो” है जिसमें वह सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ काम करते नज़र आएंगे।

 

#कविताएं आयुष्मान के ट्विटर से 

 

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