नई दिल्ली में आर.के. पुरम के भीड़भाड़ वाले रविदास कैम्प में चार महिलाओं का एक समूह रहता है जो ‘रविदास कैम्प की महिलाएं’ के नाम से जाना जाता है। ये महिलाएं हैं – चंदा श्रीवास्तव, अंगूरी देवी, अनार देवी, और चंदा शर्मा। ये ‘वेजिटोज़’ नामक एक नॉर्मल स्नैक्स (चिप्स) बनाती हैं। यही इनके रोज़गार का साधन है। या यूं कहें कि इनके लिए यह अवसर है।


महिलाओं के खिलाफ हो रहे पक्षपात के चलते उन्हें शिक्षा जैसे एक मूल अधिकार प्राप्त करने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने का अवसर नहीं दिया गया था। बहुत कम उम्र में शादी करने के बाद वे घरेलू काम और परिवार की देखभाल करने तक ही सीमित रहीं। हालांकि, इससे रविदास कैंप में रहने वाली इन बहादुर महिलाओं के हौसलों में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने महसूस किया कि देश में खाद्य अपव्यय, भुखमरी और हानिकारक जंक फूड का उपभोग हो रहा।


चंदा शर्मा का कहना है कि, “मेरे आसपास के लोग मेरे काम की सराहना करते हैं क्योंकि हम अपने घरों में बैठकर अतिरिक्त आय उत्पन्न करने में सक्षम हैं। अपने पति और बच्चों के काम पर जाने के बाद, मैं घर का काम पूरा करती हूं और फिर प्रोडक्शन सेंटर में जाती हूं। हम सब फिर आपस में काम बाँट लेते हैं। जब मुझे मेरा पहला वेतन मिला, तो मैं बहुत खुश हुई और मैंने उसे अपने पति को दे दिया। उन्होंने कहा कि इसे तुम रखो, यह तुमने कमाया है। मेरे पति बहुत सहयोगी हैं और चाहते हैं कि मैं यहां काम करना जारी रखूं क्योंकि यह मेरे परिवार को अतिरिक्त आय प्रदान करता है।” वह आगे कहती हैं कि “अब मैं अपने जैसी ही समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं की तलाश करने की योजना बना रही हूं और उन्हें चिप्स बनाने का तरीका सिखाऊंगी। यह उनके लिए अच्छा होगा; उन्हें भी लगेगा कि उन्होंने अपने परिवार के लिए कुछ कमाया है।”

कैसे हुआ यह सम्भव?

दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्यभट कॉलेज की ‘Enactus’ सोसाइटी ने ‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’ के माध्यम से पितृसत्ता और गरीबी के चंगुल में फंसी इन महिलाओं को सशक्त बनने में मदद मिली और इनके पाक-कला के मौजूदा कौशल के माध्यम से उन्हें सीखने और कमाने का स्रोत दिया। Enactus ने इन महिलाओं की पाक-कला के टैलेंट को एक उद्यमी दृष्टिकोण से जोड़ा और इन्हें कमाने का जरिया दिया।

पिछले 3 सालों में यह प्रोजेक्ट देश के कई राज्यों तक पहुँच चुका है। चंडीगढ़, फरीदाबाद, दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे स्थान इसमें प्रमुख हैं। लगभग 50 महिलाओं को इसके माध्यम से रोजगार मिला है।

‘रविदास कैम्प की ये महिलाएं’ ‘वेजीटोज़’ बनाने के कौशल में महारत हासिल कर चुकी हैं और अब वे उच्च स्तर की दक्षता हासिल करने की ओर अग्रसर हैं। वे गृहिणी और कमानेवाली दोनों का दर्जा हासिल कर चुकी हैं।

कौन हैं ‘ENACTUS’ ?

Enactus दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट कॉलेज की सोसाइटी है। 2016 में शुरू हुए ‘इनेक्टस आर्यभट्ट’ के इस सफ़र में सबसे बड़ा योगदान इस सोसाइटी से जुड़े बच्चों का है। यह छात्रों का वो समूह है जो समुदायों के समग्र विकास की दिशा में प्रयास करने के लिए हमेशा तत्पर रहता है। इनेक्टस आर्यभट्ट दृढ़ युवा उद्यमियों की एक छात्र-संचालित टीम है। यह विश्वभर में चल रहे गैर-लाभकारी संगठन ‘इनेक्टस’ की एक शाखा है। एनेक्टस आर्यभट्ट के उपाध्यक्ष सार्थक मल्होत्रा का कहना है कि “हमारा उद्देश्य असंख्य सामाजिक मुद्दों से निपटना है, जो हमारे समाज को प्रभावित कर रहे हैं। हम अमीरों और गरीबों के बीच सामाजिक और आर्थिक दूरी को कम करने की दिशा में जरूरी कदम उठाते हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। जैसे – बेरोजगारों का उत्थान, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपव्यय को कम करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और एक ऐसे समुदाय के निर्माण की दिशा में काम करना है जो सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से कायम हैं।” Enactus के कामों का ज़िक्र करते हुए वह कहते हैं कि “प्रत्येक परिवर्तन एक योजना से शुरू होता है जिसकी सफलता प्रतिबद्धता, जुनून, एक नए रास्ते को अपनाने की इच्छा, और बाधाओं को दूर करने के लिए दृढ़ संकल्प पर निर्भर करती है। इनेक्टस के हर काम में एक शानदार रिकॉर्ड है। हमने कई लोगों के जीवन पर व्यापक प्रभाव डाला है।”

यूट्यूब लिंक– https://youtu.be/-Nf-6YyWeN4

(इन कहानी के बारे में हमें लिख भेजा है रोमाना आमिर ने। रोमाना ‘Enactus’ सोसाइटी की मेंबर हैं।)

Enactus का पता: https://enactusaryabhatta.org/

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