स्रोत: ANI

शांभवी शुक्ला

पिछले 13 दिनों से चल रहे किसान आंदोलन में किसान संगठनों की ओर से आज भारत बंद का ऐलान किया गया था। जिसका समाचार तकरीबन दो दर्जन राजनीतिक दल कर रहे थे। जिसमें प्रमुख रुप से वामदल, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अकाली दल शामिल थे। बीते 12 दिनों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं और केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।

भारत बंद को लेकर सुबह ही राजधानी दिल्ली से खबर आई थी वहां के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री आवास पर नजरबंद कर दिया गया है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी और दिल्ली पुलिस के बीच बहस जारी है। पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में भी भारत बंद को प्रभावशाली बनाने की कोशिश हुई लेकिन वह असफल हुई है।

भारत बंद को लेकर जो राज्य सबकी नजरों पर था वह उत्तर प्रदेश था। यूपी में विपक्ष की ओर से भारत बंद की पूरी तैयारी थी,जो कि कहीं बेअसर रहे तो कहीं असरदार बनाने के लिए हम ग़मों का सहारा लिया गया। यूपी में अयोध्या, बाराबंकी, बलरामपुर, मेरठ, बागपत, सहारनपुर और सीतापुर में सपा और कांग्रेस नेताओं को नजरबंद किया गया। राजधानी लखनऊ में जो भी सड़क पर उतरना चाहा उसे गिरफ्तार किया गया और माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश हुई। साथ ही राजधानी में मंडी और दुकानें खुली रही। प्रदेश के बस्ती जिले में सड़क पर उतर कर जबरदस्ती दुकान बंद करवाने की कोशिश कर रहे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं।
इसी तरह मेरठ में 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। यहां तक की योगी सरकार की पुलिस ने कांग्रेस के प्रदेश सचिव एवं किसान नेता सचिन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा पूर्व राज्य मंत्री एवं सपा नेता पवन पांडे को भी घर में नजरबंद किया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में वाराणसी, गाज़ीपुर, जौनपुर, मऊ, गोरखपुर में स्थिति सामान्य रही और भारत बंद बेअसर रहा।
प्रदेश के प्रयागराज की बात करें तो सपा कार्यकर्ताओं ने सुबह करीब 9:00 बजे बुंदेलखंड एक्सप्रेस को रोक दिया।प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन पर भारत बंद के पोस्टर लगाए और पटरी पर लेट गए। पुलिस की कार्यवाही के बाद ट्रेन को रवाना किया गया।

भारत बंद की असफलता के बाद विपक्ष और सरकार में खींचातानी बनी हुई है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में किसानों से बात करने के लिए बैठक बुलाई है। इसके अलावा 9 दिसंबर यानी कल बुधवार को किसान संगठन और सरकार के बीच वार्ता पहले से ही आयोजित की गई है। देखना होगा कि यह वार्ता इस मुद्दे का हल निकाल पाती है या नहीं।

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