भारतीय-अमेरिकी लेखक राजीव मल्होत्रा की पुस्तक ब्रेकिंग इंडिया पर युवा बुद्धिजीवियों के समूह द्वारा परिचर्चा आयोजित की गयी, फोरम के निदेशक आशुतोष सिंह ठाकुर की उपस्थिति में अधिवक्ता हर्षवर्धन शर्मा, अमित रावल, राकेश सिंह भदौरिया, मानसी जैन, अनिरुद्ध अग्रवाल और अभिनव दीक्षित ने पुस्तक पर विचार रखे, परिचर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के 40 बुद्धिजीवी युवाओं ने भाग लिया।
पाठकों द्वारा बताया गया कि लेखक राजीव मल्होत्रा की पुस्तक ‘ब्रेकिंग इंडिया’ पश्चिमी खासकर यूरोपियन ताकतों द्वारा मानवधिकार के नाम पर द्रविड़ियन और दलित अलगाववाद को बढ़ावा दिया जाकर भारत को खंडित करने की साजिश पर केंद्रित है।

‘द्रविड़ और दलित भेदों में पश्चिमी हस्तक्षेप का खुलासा’

‘भारत विखंडन’ में द्रविड़ और दलित भेदों में पश्चिमी हस्तक्षेप का खुलासा किया गया है। यह पुस्तक द्रविड़ और दलित पहचान, दोनों के ऐतिहासिक उद्भव पर प्रकाश डालती है, और साथ ही उन वर्तमान षड़यंत्रकारियों पर भी, जो इन अलगाववादी पहचानों को एक विशेष स्वरुप देने में लगे हैं। परिचर्चा में मैक्स मूलर, थोमस काल्डवेल, सेंट थॉमस इत्यादि अनेक विचारकों और पश्चिमी ईसाई प्रचारकों द्वारा दी गई विभिन्न थियरी कैसे भारत के साहित्य, इतिहास व अस्मिताओं को विकृत कर गृह युद्ध की भूमिका तैयार की जा रही है, इसपर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि अमेरिका और यूरोप के चर्च द्वारा भारत में अनेक संगठन, थिंक टैंक, बुद्धिजीवी इत्यादि को आर्थिक अनुदान देकर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से द्रविड़ और दलित पहचान को शेष भारत से तोड़ने के प्रयास हो रहे हैं। पश्चिम के नस्लभेद को भारत पर थोप कर आर्यन और द्रविड़ियन विवाद को जन्म दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप 200 वर्षों से इस देश में द्रविड़ियन आनफॉलन चल रहे हैं। जहाँ एक ओर अमरीका और यूरोपीय महासंघ, अनेक ऐसे लोग और संगठनों में हैं, वहीँ दूसरी और भारत में भी इनकी संख्या बढ़ रही है। ऐसे भारतीय एनजीओ आम तौर पर इन विदेशी व्यक्तियों और संगठनों की स्थानीय शाखाओं की तरह कार्य करते हैं।

परिचर्चा का संयोजन यंग थिंकर्स फोरम के संयोजक हर्षवर्धन शर्मा ने किया। अंत में फोरम के न्यासी श्री दीपक शर्मा ने कहा कि अब चूँकि आर्यन आक्रमण थियरी असत्य सिद्ध हो चुकी है, इसको शिक्षा की मुख्यधारा में अद्यतन करना चाहिए।

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