तस्वीर स्रोत: गूगल

आज का दिन बुद्ध पूर्णिमा के कारण विशेष है। माना जाता है कि वैशाख माह की पूर्णिमा को ही महात्मा बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति एवं निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। उनके राजकुमार सिद्धार्थ से सन्यासी गौतम की जीवन यात्रा ने सारी दुनिया को एक अलौकिक दर्शन दिया, जो एक मनुष्य को बेहतर मनुष्य बनाने की ओर अग्रसर करता है। आज के समय में जब चारों ओर दुःख ही दुःख नजर आ रहा है तब बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।

“दुःख से मुक्ति” ही बौद्ध धर्म का सदा से मुख्य ध्येय रहा है औऱ कर्म, ध्यान एवं प्रज्ञा इसके साधन रहे हैं। अपने दर्शन के द्वारा बुद्ध ने प्राचीन काल की कई प्रचलित धारणाओं को तोड़ा।क्रियाशील सत्य की धारणा बौद्ध मत की मौलिक विशेषता है। उपनिषदों का ब्रह्म अचल और अपरिवर्तनशील है परन्तु बुद्ध के अनुसार परिवर्तन ही सत्य है। बुद्ध के उपदेशों को उनके शिष्यों ने त्रिपिटक में संकलित किया है।

इनके दर्शन का आधार चार आर्य सत्य है जो दुःख है, दुःख का कारण है, दुःख निरोध संभव है औऱ दुःख निरोध का मार्ग है पर पूर्णतः आधारित है। माध्यम-मार्ग औऱ अष्टांगिक मार्गों का अनुसरण करते हुए हम जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य निर्वाण अर्थात मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। दो अतियों का त्यागकर मध्य मार्ग पर चलने का तरीका ही माध्यम-मार्ग एवं अष्टांगिक-मार्ग को दुखों से मुक्ति पाने एवं आत्म-ज्ञान के साधन के रूप में बताया गया है।

बुद्ध को विष्णु का अवतार भी माना जाता है। अनेक पुराणों में इसका उल्लेख भी मिलता है। उन्होंने संसार को दुःखमय माना और अज्ञानता को इसका मूल कारण बताया है। सुख क्षणिक है जो आगे चलकर दुुःख का कारण बनता है।

बौद्ध दर्शन का एक सूत्र वाक्य है-
“अप्प दीपो भव”
अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो।
तथागत सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के कहने का मतलब यह है कि
किसी दूसरे से उम्मीद लगाने की बजाये अपना प्रकाश (प्रेरणा) खुद बनो। खुद तो प्रकाशित हों ही, लेकिन दूसरों के लिए भी एक प्रकाश स्तंभ की तरह जगमगाते रहो।

बुद्ध का जीवन कर्मयोग पर आधारित है जो सिद्ध करता है कि नर अपने कर्मों के द्वारा नारायण बन सकता है। यह दर्शन हमें ख़ुद के महत्व को समझाता है, अतः हमें आत्म-ज्ञान के द्वारा सुख-दुःख से परे उठ जाना चाहिए, यह मार्ग अत्यंत कठिन अवश्य है पर असंभव नहीं है। 

■बुद्ध के कुछ उपदेश सरल विचारों मे-

1.जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो, फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता। 

2.जीवन में किसी उद्देश्य या लक्ष्य तक पहुंचने से ज्यादा महत्वपूर्ण उस यात्रा को अच्छे से संपन्न करना होता है।

3. हजारों खोखले शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है जो शांति लाये।

4.भविष्य के सपनों में मत खोओ और भूतकाल में मत उलझो सिर्फ वर्तमान पर ध्यान दो। जीवन में खुश रहने का यही एक सही रास्ता है। 

5.तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छुप सकतीं, सूर्य, चंद्रमा और सत्य।

6.इच्छा ही दुःखो का मूल कारण है।

7.मैं कभी नहीं देखता कि क्या किया जा चुका है; मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है।

8.स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफ़ादारी सबसे बड़ा संबंध है।

 

#बुद्ध के उपदेश वेब-इंडिया से

 

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