स्रोत: ANI

किसान कानूनों को लेकर देश के किसानों को खेत छोड़कर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। यह समय खेती के लिहाज से व्‍यस्‍तता का समय है, धान काटने का समय है लेकिन किसान प्रदर्शन करने के लिए मजबूर है। यह बात दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को जंतर-मंतर पर कृषि कानूनों के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कही। दिल्‍ली के सीएम ने कहा, आज दुख के मौके पर प्रदर्शन करने आये हैं। कृषि कानून के ज़रिए सरकार खेती को किसान से छीनकर कंपनियों को देना चाहती है। मैं कहना चाहता हूं कि आज़ादी के बाद जब अनाज की दिक्कत थी तब कंपनियां नहीं, किसान काम आया था और हरित क्रांति की थी।

दिल्‍ली के सीएम ने कहा, ‘2014 में चुनाव से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करेंगे। रिपोर्ट कहती है न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) डेढ़ गुना होगा लेकिन चुनाव जीतने के बाद MSP खत्म कर दिया, अब ये कह रहे हैं कि पूरे देश मे केवल 6% MSP पर लेती है सरकार ये तो और शर्म की बात है। हमने सरकारी स्कूल अस्पताल बंद नहीं किये, बल्कि ठीक किए। ऐसा ही इनको करना चाहिए था। MSP में इन्होंने पीठ में छुरा घोंपा है। उन्‍होंने कहा कि किसानों के पंजाब में एक राष्ट्रीय पार्टी है। उस पार्टी का बहुत बड़ा नेता उस मीटिंग में था जिसमे कृषि कानून बने और वे ही अब ट्रैक्टर रैली कर रहे हैं? दूसरी पार्टी बिल पास करवाकर इस्तीफा दे रही है। ये दोनों नाटक कर रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि इन कानूनों को वापिस लिया जाए। MSP पर कानून लाया जाए कि 100% फ़सल MSP पर उठेगी और लागत का डेढ़ गुना MSP दिया जाए।

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