राम मंदिर भूमिपूजन के लिए ट्रस्ट ने देश भर की नदियों और पवित्र स्थलों से जल और मिट्टी मंगाया है। 3 अगस्त को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रस्ट का महासचिव चंपत राय ने बताया था कि हमारी कोशिश है कि देश के सभी पवित्र स्थलों का जल और मिट्टी उपयोग में आए। 4 अगस्त की दोपहर को ऋषिकेश के सभी मंदिरों की मिट्टी और जल अयोध्या के कार सेवक पुरम पहुंच गया है। जल के साथ 12 हजार रूपये का सहयोग भी ट्रस्ट को दिया जाएगा। मिट्टी और जल लाने वाले संजय शर्मा जो कि पेशे से एक व्यवसायी हैं बताते हैं कि वो बाबरी विध्वंस में भी शामिल थे।

पेपर कटिंग दिखाते संजय शर्मा।

पेपर की कटिंग दिखाते हुए उन्होंने बताया की 1989 में पहली बार अयोध्या आया था, उसके बाद 1990 में कल्याण सिंह के साथ नैनी जेल में बंद था। फिर 1991 में कारसेवक पुरम में रहने लगा। वे कहते हैं कि उनका प्रण था जबतक बाबरी विध्वंस नहीं हो जाएगा तब अयोध्या से नहीं जाऊंगा। उनके अनुसार बाबरी विध्वंस में वो सम्मिलित थे। रामंदिर आन्दोलन से जुड़ने के कारण उन्होंने पढ़ाई त्याग दिया था।

इनका दावा है कि ये बाबरी विध्वंस में शामिल थे। 

विश्व हिन्दू परिषद के सवाल पर उन्होंने बताया कि वो किसी संस्था और पार्टी से नहीं जुड़े हैं। यह राम कार्य है जिसमें मैं भी कुछ योगदान देना चाहता हूँ।

पाकिस्तान से आए कश्मीरी पंडित हैं संजय शर्मा

संजय शर्मा कहते हैं कि वो पेशे से एक बिजनेस मैन हैं। उनके पूर्वज पाकिस्तान से आए थे। लेकिन इस समय वो हरिद्वार में रह रहे हैं।

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