राममंदिर के अगुवा रहे लाल कृष्ण आडवाणी। (साभार: गूगल)

5 अगस्त को होने वाले भूमिपूजन में लगातार यह सवाल उठ रहा था कि आखिर राममंदिर आंदोलन के अगुवा रहे लालकृष्ण आडवाणी को क्यों नहीं बुलाया जा रहा है।श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये इसका कारण बताया है। उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फेंस में कहा कि बेहद बुजुर्ग होने व कोरोना संक्रमण के कारण राममंदिर आंदोलन के अगुवा रहे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने यह भी कहा है कि जिन्हें नहीं बुलाया जा सका उन्हें व्यक्तिगत फोन पर माफी भी मांगी गयी है। आयु का खयाल रखते हुए 90 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को नहीं बुलाया गया है। चंपत राय ने कहा कि, ‘आडवाणी जी कैसे आ पाएंगे वह 90 साल से ऊपर हैं। कल्याण सिंह से भी मैंने कहा कि आपकी उम्र बहुत ज्यादा है आप इस भीड़ में ना आएं, वह मान गए।’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में महासचिव चंपत राय व अन्य।

बता दें कि भूमि पूजन के लिए लगभग 200 लोगों को आमंत्रित किया गया है। इस लिस्ट में वरिष्ठ भाजपा नेता और राम मंदिर आंदोलन के अगुवा नेता लालकृष्ण आडवाणी और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का नाम नहीं है। बताया जा रहा है कि ये 200 लोगों की लिस्ट उनसे पूछकर ही निर्धारित की गयी है। सभी से सलाह-मशवरा करके ही इस लिस्ट को फाइनल किया गया है। कोरोना महामारी को देखते हुए और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते सभी नॉर्म्स का पालन किया जा रहा है और उसी के आधार पर लोगों को निमंत्रण पत्र भेजा गया है।

नेपाल से भी बुलाया गया है संतों को:
भूमि पूजन कार्यक्रम में नेपाल के संतों तक को भी बुलाया गया है। महासचिव ने बताया कि पद्मश्री पा चुके फैजाबाद के मोहम्मद शरीफ़ को बुलाया गया है। वह बिना धर्म देखे लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं। लगभग 20000 से ज्यादा लावारिस लाशों का वह अभी तक अंतिम संस्कार कर चुके हैं। इसके साथ ही इकबाल अंसारी को भी निमंत्रण भेजा गया है।

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