स्रोत : जनसत्ता

शाम्भवी शुक्ला

34 साल के बाद हुआ है व्यापक परिवर्तन केंद्र सरकार ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। मेडिकल और विधि को छोड़ पूरी उच्च शिक्षा का एक नियामक होगा। अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। साथ ही अब शिक्षा पर जीडीपी का 6 फ़ीसदी खर्च किया जाएगा। आपको बता दें कि पहले शिक्षा पर 4.43 फ़ीसदी खर्च किया जाता था।

इसके अलावा शिक्षा में तमाम सारे बड़े बदलाव भी सामने आए हैं। अब पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी। वही नर्सरी से स्नातक तक के पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे को चार भागों में बांटा गया है। जिसे 5+3+3+4 का नाम दिया गया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 34 साल के बाद इतना भारी परिवर्तन हुआ है।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह बैठक हुई। जिसमें नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी गई है। आपको बता दें कि यह नीति इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ के कस्तूरीरंगन ने तैयार की है। इसका मुख्य लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा में पंजीकरण में 50% की बढ़ोतरी का है। अब तक 26.3 फ़ीसदी का है। इसके अलावा 3.5 करोड़ नई सीटों को भी जोड़ा जाएगा।
वहीं स्कूली शिक्षा में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। संभव है साल में एक बार होने वाली बोर्ड परीक्षाओं में परिवर्तन हो सकते हैं। अब बोर्ड परीक्षाओं को सेमेस्टर की तरह या दो बार कराए जाएं। इस प्रक्रिया के लिए अलग नीति बनाई जाएगी। इस नई शिक्षा नीति का स्वागत देश में जोरो से किया जा रहा है। इसके अलावा कहीं कहीं विरोध का माहौल भी है। निश्चित है कि यह नया प्रयोग शिक्षा नीति में मील का पत्थर साबित होगा।

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