बिहार की नई राजनीतिक चेतना प्लुरल्स की पार्टी प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने ट्विटर पर समान स्कूल प्रणाली पर बिहार की जनता से जनमत संग्रह मांग था। इस जनमत संग्रह में 96 प्रतिशत लोगों ने यह माना की यह प्रणाली लागू होनी चाहिए, जबकि 4 प्रतिशत लोगों ने इस प्रणाली को नकारा है। इन 96 प्रतिशत लोगों में 74 प्रतिशत ने माना कि लागू होना चाहिए जबकि 22 प्रतिशत लोगों ने इसे चालू करने के पक्ष में मत दिया पर कहा कि चरणवार तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

पार्टी प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने बताया कि “प्लुरल्स अपने बिहार के ब्लूप्रिंट को अंतिम रूप दे रहा है. इसमें “एजुकेशन रिफ़ॉर्म” के अंतर्गत एक बड़ा एजेंडा “कॉमन स्कूलिंग सिस्टम” का है, अर्थात सरकारी और निजी स्कूल की विभेदकारी व्यवस्था को चरणवार तरीके से समाप्त किया जाएगा। इसके लिए न सिर्फ़ सरकारी विद्यालयों में बिल्डिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंफ़्रा, प्रोफेशनल मिड डे मिल सिस्टम, लाखों योग्यता वाले टीचर्स की सही नियुक्ति, कॉमन सिलेबस, स्कूल बस इत्यादि के प्रावधान का प्रस्ताव है बल्कि यह अनिवार्य बनाया जाएगा कि सामान्य नागरिकों की तरह सभी सरकारी लाभ के पद पर बैठे व्यक्ति (जनप्रतिनिधि, नौकरशाह इत्यादि) अपने बच्चों को अपने नेबरहुड (निकट) के सरकारी विद्यालय में ही पढ़ा पाएँगे। इस तरह, चाहे आप मंत्री हों, डीएम हों, बीडीओ हों या स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधि, आपके बच्चे आपके लाभ के पद पर रहते आपके गाँव या शहर के सबसे निकट के स्कूल में ही पढ़ पाएँगे, जैसे उस क्षेत्र के अन्य बच्चे पढ़ते हैं। “कॉमन स्कूलिंग सिस्टम” और “नेबरहुड स्कूलिंग” की व्यवस्था सभी विकसित देशों में है और भारत में “नेशनल एजुकेशन कमीशन (कोठारी कमीशन, 1964)” के ज़माने से सत्ता-शिक्षा माफिया गठजोड़ के कारण दशकों से लम्बित है।”

उन्होंने लिखा कि इस मुद्दे पर जनमत का हमें अंदाज़ा है। हम सोशल मीडिया पर, जहां काफ़ी लोग निजी विद्यालयों से भी पढ़े हैं, उनका मत जानना चाहते हैं ताकि पॉलिसी को समग्र और व्यापक बनाया जा सके। पक्ष में “हाँ” और विपक्ष में “ना” पर मतदान करें। ट्विटर पर लोगों ने प्लुरल्स के इस जनमत संग्रह को समर्थन देकर पार्टी पर भरोसा जताया है।

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