स्रोत: जागरण

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने 4 अक्टूबर को एक बयान जारी कर यूपी सरकार की कानूनी एजेंसियों के पत्रकारों के साथ किए गए व्यवहार की निंदा की है। हाथरस केस को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस की बदसलूकी की कई खबरें सामने आई हैं।

गिल्ड ने ये भी कहा, ‘हस्तक्षेप करने के मामले में हाथरस सबसे बुरा मामला है लेकिन गिल्ड ये भी मानता है कि मीडिया पर ऐसे हमले हाल के महीनों में ट्रेंड का हिस्सा बन गए हैं। कुछ और राज्य भी पत्रकारों के उत्पीड़न में शामिल रहे हैं।’

एडिटर्स गिल्ड ने पत्रकारों के फोन टैपिंग को लेकर भी निंदा की है। बयान में कहा गया, इससे भी बुरा ये है कि पत्रकारों की बातचीत टैप की गई और उन्हें लीक किया गया, जिससे उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कैंपेन चला।

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में बीते 14 सितंबर को कथित गैंगरेप की वारदात सामने आई थी। करीब 15 दिनों बाद दिल्ली में पीड़िता की मौत हो गई। उसके बाद शव को जबर्दस्ती जलाने और परिवार को धमकाने के आरोप वहां के स्थानीय प्रशासन पर लगे। जिला प्रशासन ने मीडिया आने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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