उपवास स्थल

मेधा पाटकर 4 मई से मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा कस्बे के पास मजदूरों के साथ हुई नाइंसाफी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। पिछले 3 दिनों से बिना कुछ खाए पिए मेधा पाटकर प्रदर्शन कर रही हैं।
मेधा का कहना है कि देश भर में बिना किसी योजना के लॉक डाउन कर दिया गया जिसके कारण मजदूर तबका सबसे ज्यादा समस्याओं का सामना कर रहा है उनका कहना है कि सबसे पहले लॉक डाउन में फंसे मजदूरों की सहायता की जाए।
मेधा ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि लॉक डाउन बिना किसी योजना के तो लगाया ही गया है साथ ही राज्य और केंद्र के बीच किसी भी योजना को लेकर समन्वय नहीं है जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि लॉक डाउन के बाद मजदूर वेतन लिए बिना ही अपने घर के लिए निकल लिए। इसलिए उन्हें जीवित रहने के लिए खाने का सामान मामूली कीमत पर दिया जाना चाहिए ताकि जीवित रह सकें।
मेधा पाटकर ने कहा कि देश के श्रमिक हर क्षेत्र में अपना योगदान देते आ रहे हैं वह चाहे जीडीपी में हो, उत्पादन में हो या वितरण में हो लेकिन इसके बावजूद भी उनका ध्यान नहीं रखा जाता जो मजदूर रोज कमाता खाता है दिहाड़ी लगाता है उसका जीवन किस प्रकार गुजरेगा।

भारत में लॉक डाउन का तीसरा चरण चल रहा है देशभर में एक-एक राज्य में फंसे प्रवासी श्रमिकों पर अत्याचार आज भी जारी है मजदूर हजारों की संख्या में राज्य में फंसे हैं और शुरुआत में भी बिना किसी नोटिस के अचानक लॉक डाउन किया गया जिसके कारण हजारों मजदूर अपने मूल स्थान पर वापस जाने के लिए नेशनल हाईवे पर पैदल निकल पड़े।

मेधा ने मांग की है कि मजदूरों को प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति कोष (पीएम फंड) से सहायता दी जाए।
फिलहाल मेधा पाटकर का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है।

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