तस्वीर: PTI

19 जून को राज्यसभा चुनाव होना है उससे पहले भाजपा के लिए मणिपुर से अच्छी खबर नहीं आई। उसके साथ वही हो रहा है जो कुछ महीने पहले उसने कांग्रेस के साथ मध्यप्रदेशमें किया था। तीन भाजपा विधायकों के इस्तीफे के साथ ही बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार खतरे में आ गई है। 18 जून को अचानक उप मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली वाई. जय कुमार के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी ने अपना समर्थन वापस ले लिया जिसके बाद से मणिपुर में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है।

अब बीरेन सिंह के पास भाजपा के 18 विधायक, नागा पीपुल्स फ्रंट के 4 विधायकों के आलावा एक लोजपा के विधायक का समर्थन है। ऐसी स्थिति में भाजपा सरकार के पास 23 विधायक हैं वहीं उसके विरोध में 28 विधायक हैं। अगर स्थिति में परिवर्तन नहीं हुआ तो भाजपा के हाथ से राज्यसभा सीट जाना तय हैं। भाजपा की तरफ से नरेश लीसेम्बा सनाजाओबा और कांग्रेस ने टी. मंगी बाबू को अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।

इधर नए राजनीतिक समीकरण के बाद कांग्रेस ने राज्यपाल से सरकार के बहुमत की परिक्षण की मांग की है।

2017 चुनाव के बाद मणिपुर में त्रिशंकु विधानसभा बना था। तब कांग्रेस को 28 सीट मिली थी वहीं भाजपा को 21 सीट मिली थी। लेकिन तब भाजपा ने सभी गैर कांग्रेसी विधायकों को अपने साथ लाकर सरकार बनाया था।

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