स्रोत - ANI

देशभर में लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद रेल और बस सुविधा के बंद कर दिए जाने के कारण कई प्रवासी मजदूर और लोग अलग-अलग राज्यों में फंसे हुए हैं ऐसे में कई प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घरों के लिए निकल गए हालांकि जैसे-जैसे लोग डाउन में राहत दी जा रही है वैसे-वैसे अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के प्रबंध भी किए जा रहे हैं।परंतु इसके बावजूद भी बहुत से मजदूर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
ANI द्वारा जब ग्राउंड पर लोगों से बात करी गई तो 2 महिलाओं ने कहां की हम मोदी सरकार से कहते हैं कि हमें हमारे गांव हरदोई जिला भेजने की सुविधा करें नहीं तो हम खुद जाकर पुलिस को कहेंगे कि हमें भूखे क्या मारोगे इससे बढ़िया हमारा सर रेल की पटरी पर रख दो या फिर मेरे पूरे परिवार समेत हमें जमुना नदी में बहा दो। यह बात दोनों महिलाओं ने यूपी और हरियाणा पुलिस की रोके जाने पर कहीं।

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वही एक प्रवासी मजदूर सोनीपत से था उसने कहा कि 8-10 दिनों से चलते-चलते पांव सूज गए हैं और छाले पड़ गए हैं यहां बॉर्डर पर आया हूं तो पुलिस डंडों से मारती है और कहती है कि जहां से आए हो वहां जाओ।पर अगर वहां जाता हूं तो मकान मालिक मारता है बोलता है कि यहां तुम्हारा कोई ठिकाना नहीं है जिसके कारण अब हम यहां जंगल में भूखे प्यासे पड़े हुए हैं।

लॉकडाउन के बीच बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए जद्दोजहद जारी है। आर्थिक तंगी के चलते घर लौटने के लिए वे किराये का इंतजाम भी नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि राज्य सरकारों का दावा है कि वे इन मजदूरों के लिए भोजन आदि की व्यवस्था कर रही हैं और उनकी घर वापसी के लिए स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था भी है। लेकिन हालात कुछ और ही बयां करते है कितनों को यह सरकारी सुविधा मिल पा रही है, इसे सड़कों पर उमड़े मजदूरों के हुजूम से समझा जा सकता है। मुसीबत में घर पहुंचने के लिए किसी को पत्नी के गहने बेचने पड़े तो कोई हताश-निराश साइकिल या पैदल ही चल पड़ा है। और ऐसे ही तमाम प्रवासी मजदूर सड़कों पर चलते हुए दिखाई देंगे।

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