स्रोत - जागरण

कोरोना वायरस महामारी के कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी के परीक्षाओं को मई महीने में टाल दिया गया था , वही प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को उनके प्रोजेक्ट, इंटरनल के मार्क्स के बेस पर उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया है। वही अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए ओपन बुक एग्जाम (OBE) करवाने जा रही है दिल्ली यूनिवर्सिटी। आपको बता दें कि जुलाई के शुरुआती हफ्ते में ही एग्जाम शुरू होने थे परंतु परीक्षाओं को 10 दिन के लिए पोस्टपोन कर दिया गया। वही स्टूडेंट की प्रैक्टिस के लिए मॉक टेस्ट का प्रबंध किया गया जिसको लेकर हमने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों से बात की।

आशीष, राम लाल आनंद कॉलेज

दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज के छात्र आशीष ने बताया कि “4 जुलाई से हमारे मॉक टेस्ट शुरू हो गए और मैंने मॉक टेस्ट के पहले दिन ही रजिस्ट्रेशन करने की कोशिश की जिसमें मुझे कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ा जैसे वेबसाइट का धीरे चलना या बार-बार साइड का क्लेश हो जाना। शुरू में तो मुझे लगा कि यह दिक्कत मेरे नेटवर्क की वजह से हो रही है जिसकी वजह से मुझे रजिस्ट्रेशन करने में परेशानी हुई। फिर मैंने 11:30 बजे के शिफ्ट वाले मॉक टेस्ट में दोबारा कोशिश की। और मैं डियू  साइट पर जाता हूं तो मुझे हिंदी पत्रकारिता की किसी भी विषय का पेपर नहीं मिलता । मैंने इस बीच कई बार स्क्रॉल किया लेकिन मुझे निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला। मैं डर गया कि कहीं मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी। फिर मैंने अपने साथियों से पूछा लेकिन उन्होंने भी यही बताया कि हमारा पेपर अपलोड नहीं किया गया है। फिर मैंने अपने कॉलेज ग्रुप में मैसेज भी किया लेकिन मेरे मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया गया। डीयू एक नोडल ऑफिसर भी तैनात किया हुआ है, तब मैंने उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया।”
आशीष ने हमें यह भी बताया कि “5 जुलाई को भी 7:30 बजे से मैंने चेक करना शुरू कर दिया लेकिन हमारे किसी भी विषय का पेपर नहीं था फिर 11:00 बजे फिर मैंने एक बार ट्राई किया, पेपर फिर भी नहीं मिला।”
वही आशीष कहा की प्रशासन एक तरफ अपने नोटिस पर नोटिस निकाल रहा है लेकिन हम छात्रों की परेशानी कोई भी महसूस नहीं कर रहा है। हम छात्रों को चिंता सता रही है कि हम कॉलेज के एग्जाम के लिए पड़े हैं किसी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए, इस परेशानी के कारण मुझ जैसे छात्रों पर दबाव आ गया है।
जैसा कि हमें आशीष ने बताया कि वह नई दिल्ली विधानसभा में रहते हैं जो पूरी दिल्ली का केंद्र है परंतु उस जगह पर भी उन्हें नेटवर्क जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तो दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले स्टूडेंट कैसे एग्जाम दे पाएंगे।

पल्लवी , भीम राव अंबेडकर कॉलेज

दिल्ली विश्वविद्यालय के भीमराव अंबेडकर कॉलेज की छात्रा पल्लवी हमें बताती हैं कि “मॉक टेस्ट का एग्जाम देते समय हर सब्जेक्ट के क्वेश्चन पेपर अपलोड नही किए गए थे जिसके कारण मुझे बहुत सारे क्वेश्चन पेपर को डाउनलोड करके देखना पड़ा जिसमें काफी समय की बर्बादी हुई।” उन्होंने कहां की “ऑनलाइन एग्जाम का जो प्रोसेस है वह 3 घंटे में पॉसिबल नहीं है क्योंकि नॉर्मली डियु की वेबसाइट क्लेश करती है और उसके बाद आंसर शीट स्कोर अपलोड करने के लिए पीडीएफ का एक्साइज बोला गया है। तो स्टूडेंट्स को स्ट्रेस रहेगा कि पहले आगे का पेपर सॉल्व करें या पीडीएफ बनाएं और उसको अपलोड करें तो उसकी वजह से पेपर इनकंप्लीट रह सकता है।”
पल्लवी बताती हैं कि “मॉक टेस्ट में सारे पेपर में बस सब्जेक्ट का नाम लिखा था और कोर्स का नाम नहीं लिखा था जिसकी वजह से हर क्वेश्चन पेपर को डाउनलोड करके देखना पड़ा कि वह हमारे कोर्स का है या नहीं। उसमें भी काफी टाइम की बर्बादी हुई।”
उन्होंने यह भी कहा “दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बोला है कि मॉक टेस्ट इसलिए लिया जा रहा है कि ओपन बुक एग्जाम का पैटर्न पता चल जाए। लेकिन इस ओपन बुक एग्जाम के कारण हम छात्रों के बीच में काफी स्ट्रेस बढ़ रहा है।

शिल्पा दुबे, श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज की छात्रा शिल्पा दुबे बताती है कि “दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन एग्जाम कंडक्ट कराने की तो सोच ली है लेकिन अगर हम बात करते हैं दूरदराज के रहने वाले छात्र- छात्रों की जैसे कश्मीर, लद्दाख, बिहार उत्तर प्रदेश आदि जैसे शहरों की तो यहां इंटरनेट की समस्या होना स्वभाविक है। तो ऐसे छात्रों को लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी क्या सोच रही है?”
वही अगर बात करते हैं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की जिनके पास रिचार्ज कराने के पैसे नहीं होंगे या अच्छी टेक्नोलॉजी नहीं है जैसे मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर तो ऐसे छात्र परीक्षा से वंचित रह जाएंगे। वही जो स्टूडेंट कॉलेज की मिड सेमेस्टर ब्रेक में अपने घर चले गए थे अपने कॉपी- किताब को यही छोड़कर तो उनकी पढ़ाई कैसे हो रही होगी।
दिल्ली यूनिवर्सिट ने ऑनलाइन क्लासेज भी चलाई थी लेकिन अगर मैं अपने क्लास की बात करती हूं तो 35 छात्रों में से केवल 10 या 15 छात्र ही ऑनलाइन क्लास अटेंड कर पा रहे थे।
वैसे ही बहुत सी समस्याएं हैं जिन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है जो किसी के लिए भी डिप्रेशन का कारण बन सकता है।

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