पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा सऊदी अरब के दौरे पर हैं। उन्होंने वहां के उपरक्षामंत्री से मुलाकात की है। पाकिस्तान की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि जनरल बाजवा सैन्य और रक्षा से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए सऊदी अरब गए हैं।

वैसे तो पाकिस्तान और सऊदी अरब एक मित्र राष्ट्र हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में यह देखा गया है कि पाकिस्तान कई मौकों पर सऊदी अरब के खिलाफ राय देता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिससे सऊदी काफी नाराज है। यह इसी नाराज़गी का नतीजा है कि सऊदी ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने तक का कह दिया है। साथ ही उधार का तेल देने से भी मना कर दिया है। अगर यह सिलसिला सऊदी अरब लम्बे समय तक जारी रखा तो पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब ,पाकिस्तान और ईरान के बीच बढ़ती दोस्ती से भी खासा नाखुश है।

पाकिस्तान हमेशा से सऊदी अरब पर यह दबाव बना रहा है कि वह कश्मीर मामले पर भारत का पक्ष न ले। लेकिन सऊदी अरब पाकिस्तान की बातों को नजरअंदाज कर दे रहा है। जिसका नतीजा यह हुआ पाकिस्तान ने धमकी अंदाज में कहा कि अगर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक उसकी बात नहीं सुनता तो वह अन्य मुस्लिम देशों के साथ एक नए समूह में विचार करेगा। सऊदी ने इसे अपने नेतृत्व के खिलाफ देखा। पाकिस्तान ने पिछले साल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के गेस्ट आफ आनर के तौर पर सम्मिलित होने का भी विरोध किया था।

पाकिस्तान पत्रकारों का कहना है कि अगर सऊदी अरब आने वाले समय में भी नहीं माना तो पाकिस्तान के लिए बड़ी आर्थिक मुसीबत खड़ी हो जाएगी। जनरल बाजवा के इस पूरे दौरे का एक मकसद यह भी है कि सऊदी अरब को फिर से मदद के लिए मनाया जा सके।

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