स्रोत - जागरण

शाम्भवी शुक्ला

राफेल विमानों के आगमन के साथ ही उसके रखरखाव की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। अब कुछ ही घंटे में यह भारत की भूमि पर होगा। इसके लिए वायुसेना ने भी विशेष व्यवस्थाएं की हैं। अंबाला एयरबेस पर शेल्टर, हैंगर और अन्य सुविधाओं जैसे बुनियादी ढांचे पर भी वायुसेना ने काम किया है।

इस पूरी प्रक्रिया को फ्रांसीसी जानकारों की देख रेख में बनाया गया है, जिससे कि उसके संचालन और रखरखाव में कोई दिक्कत न हो। इसमें 400 करोड़ रुपए की लागत आयी है।आपको बता दें कि राफेल के भारतीय सेना में शामिल होने से भारत का जंगी मनोबल बढ़ेगा।
जब एकतरफ पाकिस्तान के साथ शीत युद्ध चल रहा है। उस समय इसकी क्षमता भारत के लिए बेहद जरूरी है।यह हथियारों को ले जाने में सक्षम है।वहीं यूरोपीय मिसाइल निर्माता एमबीडीएस की मिटोर,स्कैल्प क्रूज मिसाइल, मीका हथियार प्रणाली शामिल है।
आपको बता दें कि औपचारिक रूप से 15 अगस्त के बाद ये सेना में शामिल होंगे। विशेष बात यह भी है कि भारत आने पर इसको नया नाम दिया जाएगा। हालांकि 10 राफेल फ्रांस द्वारा अभी भेजें जा रहे हैं। वहीं 5 विमानों पर वायुसेना का प्रशिक्षण जारी है। दूतावास ने जानकारी दी है कि यह प्रशिक्षण अभी 9 महीने तक चलेगा। बाकी के विमान 2021के अंत तक भारत को सौंपने की तैयारी है।

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