tnn online

तूर्यनाद के दसवें दिन देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या का स्वावलंबन से बनेगा आत्मनिर्भर भारत विषय पर व्याख्यान हुआ। डॉ चिन्मय पंड्या इंग्लैंड में डॉक्टर की अपनी नौकरी त्यागकर मातृभूमि की सेवा के भाव से पुनः भारत लौटे। 2010 से लगातार देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति के रूप में वे अपनी सेवाएँ दे रहे है, साथ-साथ राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई नामी शासकीय व अशासकीय संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं।

आत्मनिर्भर होने से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मा पर निर्भर होना
गायत्री महामंत्र के उच्चारण से अपनी बात शुरू करते हुए डॉ चिन्मय ने कहा कि आत्मनिर्भर होने से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मा पर निर्भर होना। आज की विषम परिस्थितियाँ मनुष्य के मन में आतंक उत्पन्न करती हैं, किंतु साथ ही साथ अच्छी एवं जागृत आत्माओं को कुछ करने एवं आगे आने का संकल्प भी देती हैं।
वर्तमान परिस्थतियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. पंड्या ने कहा कि आज के समाज का बाहरी प्रारूप कैसा भी हो लेकिन आंतरिक खोखला है। जितनी तेजी से घरों का आकार बढ़ा है, उतनी ही तेजी से पारिवारिकता सिमटी है। आज मनुष्य के दिल से अपनेपन, स्नेह और विश्वास का स्थान शंका, संदेह और कठोरता ने ले लिया है। यदि इसका प्रतिरोध नहीं किया गया तो मानवता बहुत गहरे गड्ढे में गिर जाएगी। इसीलिए आज की जरूरत है कि जागृत आत्माएं आगे आएं एवं मानवता को इस अंधकार भरे वातावरण से उभारें।
राजा भारत और नारद मुनि की कहानी का उदाहरण देते हुए डॉ पंड्या ने कहा कि हमें सब कुछ जीतने के बजाय अपने व्यक्तित्व पर विजय पानी चाहिए। हम बाहरी उपलब्धियों के बजाय आंतरिक उत्कृष्टता को महत्व दें क्योंकि उसे छीन पाना असंभव है।

व्याख्यान के अंत में समिति के पूर्व छात्र अध्यक्ष अभिलाष पटेरिया ने डॉ चिन्मय पंड्या का आभार व्यक्त किया एवं तूर्यनाद को इस आयोजन की शुभकामनाएँ दीं।

पुस्तक समीक्षा के परिणाम घोषित
प्रथम विजेता- शिवांगी द्विवेदी, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
द्वितीय विजेता- पूजा सेन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल
तृतीय विजेता- सोहन दिक्षित, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल

गुरुवार के कार्यक्रम
सायं 5 बजे केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के सहायक निदेशक श्री नारायण चौधरी अतिथि वक्ता के रूप में जुड़ेंगे।

तूर्यनाद के बारे में और अधिक जानकारी एवं नवीन सूचनाएँ (अपडेट्स) आप तूर्यनाद के फ़ेसबुक पेज https://m.facebook.com/tooryanaad/ और वेबसाइटhttp://www.tooryanaad.in/ पर देख सकते हैं एवम् तूर्यनाद की यूट्यूब चैनल के माध्यम से कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण देख सकते है।

Leave a Reply