प्रेस कॉन्फ्रेंस में महासचिव चंपत राय व अन्य।

5 अगस्त को अयोध्या में राममंदिर भूमि पूजन होना है। इस कार्यक्रम के बीच कई विवाद सामने आ रहे हैं। कई दिनों से भगवान राम की पोशाक के रंग को लेकर सवाल किये जा रहे थे। बता दें कि बुधवार को भूमिपूजन के दिन राम लला को हरे रंग की पोशाक पहनायी जाएगी। इसी पर कई लोग आपत्ति दर्ज कर रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री से जोड़कर देख रहे हैं। अब इस पूरे मामले पर श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जवाब दिया है। चंपत राय ने कहा कि हरे रंग का कोई ताल्लुक प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री या ट्रस्ट से नहीं है। इसका ताल्लुक परंपरा से है, पुजारी जी प्रत्येक दिन किस रंग के कपड़े हो इसका निर्धारण शुरू से करते आ रहे हैं और यह पहले से ही स्थायी तय है, यह दूसरों से प्रभावित होकर परिवर्तित नहीं किया जाता है।

महासचिव चंपत राय ने आगे कहा कि हमारे चारों ओर हरे पेड़ दिख रहे हैं, ये समृद्धि का प्रतीक हैं। जिस किसान के घर में हरियाली खेत में सुख जाए उस किसान की खेती खत्म हो जाती है। ये प्रकृति का रंग है। उन्होंने वहां बैठे पत्रकारों से पूछा कि बीमार होने पर डॉक्टर हरी सब्जी खाने के लिए कहता है तो क्या हरी सब्जी खाना इस्लाम खाना है? रंग के ऊपर चर्चा करना ये बुद्धि के दिवालियापन और विकलांगता का प्रतीक है। कहीं भी हिन्दू धर्म में किसी रंग का निषेध नहीं लिखा गया है। श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने भी कहा कि इसका अंतिम निर्णय पुजारी ही करते हैं कि कौन-से रंग के वस्त्र भगवान को पहनाएं जाएं।

हरा रंग हिंदुस्तान की समृद्धि का प्रतीक है। अतः इसे उसी तरह देखा जाना चाहिए। चंपत राय ने यह भी बताया कि भूमि पूजन में इकबाल अंसारी और पद्मश्री मोहम्मद शरीफ को भी आमंत्रित किया गया है।

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