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मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल की राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा आयोजित हिन्दी का सबसे बड़ा महोत्सव “तूर्यनाद” 14 सितम्बर, 2020 से 26 सितम्बर, 2020 तक आयोजित करवाया जा रहा है। तूर्यनाद’20 के अंतर्गत कार्यक्रम के आंठवे दिन का समापन बहुप्रतीक्षित प्रतियोगिता पुस्तक समीक्षा एवम् अतिथि व्याख्यान के साथ हुआ। एक ओर पुस्तक समीक्षा में प्रथम चरण से चयनित प्रतिभागियों ने चयनित पुस्तकों पर ‘पुस्तक चर्चा’ में भाग लिया वहीं दूसरी ओर अतिथि वक्ता श्री ललित कुमार जी ने कविता कोश की संस्थापना की अपनी यात्रा का वर्णन किया।

पुस्तक समीक्षा का अंतिम चरण

इस वर्ष नई पहल करते हुए वर्तमान युवा पीढ़ी के मन में हिन्दी भाषा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करने के साथ उनकी पठन-पाठन व तर्क क्षमता को विकसित करने के उद्देश्य से पुस्तक समीक्षा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में आईसेक्ट समूह के प्रबन्ध निदेशक श्री संतोष चौबे जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समीक्षा में निर्णायक की भूमिका में इंस्टीट्यूट फॉर एक्सीलेंस, भोपाल में प्रोफेसर के पद पर पदस्थ डॉ आनंद सिंह जी एवम् तूर्यनाद के पूर्व महासचिव एवं यंग थिंकर्स फोरम के संस्थापक श्री आशुतोष सिंह ठाकुर जी रहे। प्रथम चरण में प्रतिभागियों से चयनित पुस्तकों की लिखित समीक्षा मंगवाई गई जिसमें 7 प्रतिभागियों का चयन अंतिम चरण के लिए किया गया। अंतिम चरण में श्री संक्रांत सानू जी की ‘अंग्रेज़ी माध्यम का भ्रमजाल’, श्री अमृतलाल नगर जी की ‘नाच्यो बहुत गोपाल’ और श्री श्रीलाल शुक्ल जी की ‘राग दरबारी’ पर प्रतिभागियों ने लाइव पुस्तक समीक्षा की। प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता और वक्तव्य कला का प्रदर्शन करते हुए निर्णायकों के प्रश्नों के उत्तर बहुत सटीकता से दिए। पुस्तक चर्चा के इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से किया गया जिससे अधिक से अधिक लोग साथ जुड़ सके। अंत में श्री संतोष चौबे जी ने साहित्य को सही ढंग से पढ़ने के महत्व को समझाते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया एवम् युवाओं के मध्य साहित्य की लोकप्रियता बढ़ाने वाली इस पहल के लिए तूर्यनाद की सराहना की।

अतिथि व्याख्यान – कविता कोश के संस्थापक श्री ललित कुमार जी

कविताकोश संस्थापक ललित कुमार

कविता कोश के रूप में हिन्दी साहित्य संकलन की यात्रा की लघुकथा

कविता कोश एवं गद्य कोश की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की यात्रा साझा करते हुए ललित जी ने बताया कि 2006 में हमने कविता कोश नाम की स्वयंसेवा योजना का एक स्वप्न के रूप में आरम्भ किया। इसका कारण यह रहा कि उस समय विकिपीडिया जैसे स्रोत दूसरी भाषाओं में काफी विकसित थे लेकिन हिंदी में नहीं। हमें ऐसे स्रोत की आवश्यकता लगी जो भारतीय भाषाओं के साहित्य का व्यवस्थित रूप से संकलन कर सकें। जब आप कोई स्वप्न देखते हैं जो समाज में अभी उपलब्ध नहीं तो उस स्वप्न को स्वयं ही मूर्त रूप में स्थापित करना पड़ता है। इसी स्वप्न के साथ हमने ऐसी पुस्तकें जुटाई जो विलुप्त होने की कगार पर थी। हमनें घर घर जाकर पुस्तकें एकत्रित की और अंततः 14 वर्षों के अथक प्रयासों के बाद वर्तमान में हमारे पास डेढ़ लाख से अधिक रचनाएं कविता कोश पर उपलब्ध है और प्रति माह पांच से छह लाख पाठक इनका प्रयोग कर रहे हैं। विदेशों के अपेक्षित हमारे देश में लोग स्वयं सेवा का कार्य कम करते हैं। आज तकनीकी एवं अन्य क्षेत्र में युवाओं का दायित्व बनता है कि वह भाषा एवं संस्कृति को सहेजने का यह कार्य निःस्वार्थ भाव से करें।
कविता कोश से जुड़े अनुभव को साझा करते हुए ललित जी कहते हैं कि तमाम तकनीकी शिक्षा के बावजूद कविता कोश मेरे दिल के काफी करीब है और इससे मेरे जीवन में पूर्णता आई है।
हिंदी समेत दूसरे भाषाओं और बोलियों को सहेजने में कविता कोश की भूमिका का वर्णन करते हुए ललित जी ने कहा कि हिंदी के साथ-साथ हिंदी के अंचल में बोलने वाली क्षेत्रीय भाषाओं को सहेजना भी हमारा कर्तव्य है। आज कविता कोश में हिंदी ही नहीं बल्कि 40 से अधिक बोलियों के साहित्य का संकलन मिलता है।
भाषा की महत्ता का वर्णन करते हुए ललित जी कहते हैं कि यदि हम गहराई से सोचें तो भाषा जादू से कम नहीं। हमने कुछ ऐसी ध्वनियों का ज्ञान प्राप्त किया जो बहुत सारे लोगों के मध्य समान है। हम इन ध्वनियों का उच्चारण करते हैं उसी समय दूसरे लोग इसे ग्रहण कर पाते हैं। हर भाषा अपने अंदर एक संस्कृति समेटे हुए है, इतिहास समेटे हुए हैं उसे लुप्त होने से बचाना हमारा कर्तव्य है।
आज के साहित्य में आए परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए ललित जी कहते हैं कि आज के साहित्य को हम देखते हैं तो पाते है कि वह अपने उद्देश्य से भटका हुआ है। साहित्य का सही मायनों में उद्देश्य समाज को सही दिशा दिखाना एवं लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है। यह बात पूर्व के साहित्यों में देखी जा सकती है।
हिंदी भाषा में तकनीकी विषयों पर उपलब्ध कम संसाधनों पर चिंता व्यक्त करते हुए ललित जी कहते हैं कि ऐसे कई विद्यार्थी हैं जो तकनीकी विषय में सहज है लेकिन अंग्रेजी में नहीं। उनके पास स्वभाषा में ज्ञान अर्जित करने का विकल्प ही नहीं है। यह समाज का दायित्व बनता है कि वह उन्हें ऐसा विकल्प दे कि वह विषय को मुख्य केंद्र में रखें एवं भाषा ज्ञानवर्धन में अवरोधक न बने।

मंगलवार के कार्यक्रम

कल सायं 5 बजे से बहुप्रतीक्षित प्रतियोगिता अभिव्यक्ति करवाई जाएगी जिसमें प्रतिभागी नृत्य, गायन, वादन व अभिनय कलाओं में अपनी प्रस्तुति देंगे।

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