तस्वीर :BCCI ट्वीटर

विशाल यादव

1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में स्वर्ण विजेता भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान रहे चुन्नी गोस्वामी का गुरुवार शाम 5 बजे दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। चुन्नी गोस्वामी मधुमेह और तंत्रिका तंत्र संबंधित बीमारी से भी पीड़ित थे। चुन्नी गोस्वामी भारतीय फुटबॉल के सर्वश्रेष्ठ फॉरवर्ड प्लेयर्स में से एक थे। 1962 जकार्ता एशियन गेम्स में चुन्नी ने कुल 5 मैचों में 2 गोल मारा था। चुन्नी ने भारतीय फुटबॉल टीम के लिए 1956 से 1964 तक 50 मैच खेले। पीके बनर्जी , टी. बालाराम और चुन्नी गोस्वामी को भारतीय फुटबॉल टीम का तिकड़ी कहा जाता है। तीनों खिलाड़ियों का एक साथ फुटबॉल खेलते देखना बहुत ही रोमांचक होता था।

पहला ग्लैमर बॉय

चुन्नी गोस्वामी को उनके बेहतरीन खेल और स्टाइल के लिए भारतीय फुटबॉल का पहला ग्लैमर बॉय माना जाता है.चुन्नी गोस्वामी का असली नाम सुबीमल गोस्वामी (subimal goswami) है। सभी लोग प्यार से उनको चुन्नी पुकारते थे. उनका जन्म 15 जनवरी 1938 में किशोरगंज जिला बांग्लादेश में हुआ था। चुन्नी गोस्वामी 9 साल की उम्र में मोहन बागान जूनियर टीम से जुड़ गए। अच्छे प्रदर्शन के कारण 1954 में मोहन बागान सीनियर टीम में उनको चुन लिया गया। चुन्नी जल्द ही 1955 में वेस्ट बंगाल की तरफ से संतोष ट्रॉफी खेलने उतरे। 1955 का संतोष ट्रॉफी का फाइनल मैच वेस्ट बंगाल और मसूरी के बीच खेला गया। फाइनल मैच अपने रोमांचक दौर में था दोनों टीमें गोलरहित बराबर पर थी तभी चुन्नी गोस्वामी ने शानदार थ्रू पास पर विंगर पीके बनर्जी ने इकलौता गोल मारा। जिससे वेस्ट बंगाल उस साल का संतोष ट्रॉफी चैंपियन बना।

चुन्नी गोस्वामी तस्वीर :Sport Star द हिन्दू)

1955 के संतोष ट्रॉफी में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद चुन्नी गोस्वामी को 1956 मेलबर्न ओलंपिक्स के भारतीय फुटबॉल टीम के लिए नहीं चुना गया। निराश चुन्नी ने अपने खेल को और अधिक निखारा और 1958 के टोक्यो एशियन गेम्स खुद को भारतीय टीम के लिए चयनित करवाया। उसके बाद चुन्नी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा बतौर कप्तान चुन्नी ने 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता और 1964 के एशियन गेम्स और मर्डेका टूर्नामेंट में उपविजेता रहे.

ऑलराउंडर खिलाड़ी

चुन्नी गोस्वामी फुटबॉल के अलावा क्रिकेट भी बहुत अच्छा खेलते थे। चुन्नी वेस्ट बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कुल 46 मैच खेला। वह बतौर कप्तान 1972 का रणजी ट्रॉफी खेला। 1972 के रणजी फाइनल मैच में वेस्ट बंगाल को मुंबई के हाथों हार मिली. चुन्नी ने कुल 46 मैचों में 1592 रन और 47 विकेट भी लिए हैं. चुन्नी फुटबॉल,क्रिकेट के अलावा हॉकी और लॉन टेनिस भी क्लब लेवल पर खेला था.

तस्वीर BCCI ट्वीटर एकाउंट

चुन्नी गोस्वामी को कई सम्मान भी मिले हैं जिनमें 1962 में बेस्ट स्ट्राइकर ऑफ एशिया अवॉर्ड 1963 में भारत सरकार की तरफ से अर्जुन अवार्ड और 1983 में पद्मश्री अवार्ड दिया गया। मोहन बागान क्लब ने 2005 में अपने सबसे बड़ा सम्मान मोहन बागान रत्न से सम्मानित किया।

(लेखक भारतीय जन संचार संस्थान में अध्ययनरत हैं।)