वर्धा,(महाराष्ट्र) कोरोना से उत्पन्न संकट और चुनौतियों का हम डटकर मुकाबला करते हुए समन्वय,संतुलन और संवेदना की नयी आचार संहिता अपनाकर इस पर विजय हासिल करेंगे। भावनिक अंतर को बरकरार रख कर हमें प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर व्यक्ति, समाज और संस्थाओं को मजबूत करना होगा। महात्मा गांधी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेणे कहिए जो पीड़ परायी जाने रे’ की भावना से हमें भय, आतंक और अतिरेकी साहस्वार न करते हुए अन्यों का ध्यान रखना चाहिए। उक्त विचार डॉ. विनय सहस्त्रबुध्दे ने व्यक्त किए। वे नई दिल्ली से संबोधित कर रहे थे।

‘कोविड- 19 का संकट और छात्र युवा की नागरिक भूमिका’
विषय पर राज्यसभा सांसद तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के चेयरमैन डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे का विशिष्ट व्याख्यान हिंदी विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज से गुरूवार को सायं 5 बजे आयोजित किया गया।

डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने कोरोना को लेकर जारी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सलाह देते हुए कहा कि औरों के प्रति सामाजिक दायित्व की भावना से पेश आना समय की मांग है। भौतिक अंतर भलेही रहे परंतु हमारे मन, मष्तिष्क और सोचने के तरीकों में खुलापन होना चाहिए। संवेदनशील आचरण से अन्य धाराओं का स्वागत हमारी दैनिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए।कोरोना से बिगड़ी आर्थिक हालातों पर उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में कम आमदनी,कम छात्रवृत्ति और कम खर्चिले कामों के बीच हमें पढ़ने-पढ़ाने का काम करना होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि महात्मा गांधी जी के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय इस दिशा में मिसाल प्रस्तुत करेगा। आनलाइन संवाद के इस पहल के लिए उन्होंने कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल को धन्यवाद दिया।

प्रारंभ में कुलपति प्रो. शुक्ल ने डॉ. सहस्त्रबुद्धे का स्वागत करते हुए उनका परिचय दिया। इस व्याख्यान को विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ फेसबुक से जुड़े अध्यापकों ने सुना।

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