प्रतीकात्मक तस्वीर ( आउटलुक इंडिया )

पिंकी

भारतीय राजनीति को प्रभावित करने वाले सामाजिक गतिविधियों में जाति का प्रमुख स्थान है। जाति आधुनिक भारत की राजनीति का केंद्रीय अंग बन गई है। जाति भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण लक्षण है भारतीय समाज जटिलताओं से परिपूर्ण है। उनमें से एक जटिलता समाज के वर्गीकरण हेतु प्रयुक्त शब्द जाति संबंधित है शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से जाति शब्द संस्कृत की जननी धातु से हुई है। ब्राह्मणी वर्ण व्यवस्था में जिन लोगों को समाहित नहीं किया जा सका, उन्हे जाति के रूप मे संगठित किया गया। जाति जन्म पर आधारित प्रणाली व्यवस्था है।

जाति आज भारतीय राजनीतिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण तत्व है जैसे जयप्रकाश नारायण का विचार है “जाति भारत में एक सबसे राजनीतिक दल के रूप में कार्य कर रही है।”राजनीति एक प्रतियोगी प्रक्रिया है इसका उद्देश्य शक्ति की प्राप्ति से कुछ उद्देश्यों की पूर्ति करना है यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अलग-अलग स्थितियों और कार्यवाहीओ को एकत्रित किया जाता है और समझौते किए जाते है। सबसे महत्वपूर्ण बात समर्थन को जुटाना है वहां कई संरचनाओं के द्वारा समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस श्रेणी में जाति पर आधारित संरचनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। क्योंकि समाज में जनसंख्या कई जाति संरचनाओं में विभाजित होती है राजनीति इन जाति संरचनाओं के आधार पर चलाई जाती है।
भारत की राजनीतिक व्यवस्था की एक विशेषता है कि राजनीतिज्ञ निश्चित रूप से जाति की नीति का विरोध करते हैं। परंतु चुनाव के समय जाति के आधार पर ही वोट मांगते हैं। भारत की राजनीतिक व्यवस्था की एक विशेषता है कि राजनीतिज्ञ निश्चित रूप से जाति की नीति का विरोध करते हैं परंतु चुनाव के समय जाति के आधार पर ही वोट मांगते हैं। भारतीय दलीय व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए तो कई राजनीतिक दलों का गठन जाति के आधारित है। वर्तमान स्थिति में बहुजन समाज पार्टी,तमिलनाडु में डीएमके तथा एआईएडीएमके,पंजाब में अकाली दल तथा बंगाल में रिपब्लिकन पार्टी आदि जाति आधारित राजनीतिक दल है।जातिवाद भारतीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। देश के अनेक राज्य जातिवाद से प्रभावित हैं जैसे राजस्थान में जाट बनाम राजपूत, हरियाणा में जाट बनाम ब्राह्मण, तमिलनाडु में ब्राह्मण बनाम गैर ब्राह्मण ,महाराष्ट्र में ब्राह्मण बनाम गैर ब्राह्मण ,गुजरात में बनिया बनाम पाटीदार इत्यादि।

औद्योगीकरण नगरीकरण,पश्चिमीकरण ,वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप थोड़े लोगों की मनोवृति में चाहे परिवर्तन आया है साथ ही कई सामाजिक कुरीतियों पर प्रतिबंध लगा है। जाति की शक्तियां आधुनिकीकरण के बावजूद कमजोर पड़ने की बजाय अधिक मजबूत होती जा रही हैं। इसका मुख्य कारण राजनीतिक स्वार्थ है।भारत में जात पात की राजनीति ने भारतीय समाज तथा लोकतंत्र को प्रभावित किया है।
हमारे राजनीति मे व्याप्त कमियों जैसे परिवारवाद ,साक्षर राजनीतिज्ञों आदि की कमियों को दूर कर जाति के राजनीतिकरण को संभावित रूप से कमी लाई जा सकती है।

(लेखिका दिल्ली विशवविद्यालय किरोड़ीमल कॉलेज की छात्रा है।)

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