स्रोत : गूगल

अभी तक सांस, मुंह, व नाक से निकलने वाली ड्रापलेट्स और थूक से ही कोरोना वायरस का खतरा माना जाता था, लेकिन इस वायरस ने धीरे-धीरे लोगों को संक्रमित करने का रास्ता बदल दिया है। यह शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। यहां तक कि मां का गर्भ भी। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अपने पैर पसार लिए हैं, इस महामारी की चपेट में बड़े बूढ़े से लेकर शिशु तक चपेट में आ चुके हैं। ऐसा ही एक मामला राम मनोहर लोहिया अस्पताल का आया है मां के गर्भ में पल रहे नवजात बच्चे को कोरोना संक्रमण होने का देश का पहला मामला सामने आया है। आरएमल अस्पताल के डॉक्टरों ने यह दावा किया है।

आरएमल के नवजात रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर राहुल चौधरी का कहना है कि “जिस समय बच्चे की डिलवरी हुई थी उस समय मां कोरोना को हराकर ठीक हो चुकी थी लेकिन जब बच्चे की डिलवरी हुई और छह घण्टे बाद उसका सैम्पल लेकर जांच के लिए भेजा गया तो बच्चा कोरोना संक्रमित निकला। डॉक्टर राहुल का दावा है कि कोरोना नेगेटिव मां के गर्भ से कोरोना संक्रमित बच्चे का जन्म होना यह देश का पहला मामला है। उन्होंने बताया कि चीन में कुछ शोध में यह बात सामने आई थी कि गर्भनाल के जरिये भी कोरोना वायरस मां से बच्चे तक पहुंच सकता है हालांकि इस शोध में ठोस सबूत नहीं थे।”

दिल्ली के नांगलोई की रहने वाली 25 वर्षीय रुचि गर्भवती थी और पिछले महीने उन्हें आरएमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 जून को उनकी कोरोना की जांच कराई गई तो वे संक्रमित निकली। इसके बाद इनके पति को भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद 25 जून को कोरोना की दोबारा जांच कराई तो रुचि की रिपोर्ट फिर से पॉजिटिव आयी। डॉक्टरों ने 7 जुलाई को तीसरी बार आरटीपीसीआर जांच कराई तो वह रिपोर्ट निगेटिव आयी। यानी रुचि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुकी थी। डॉक्टर राहुल चौधरी ने बताया कि रिपोर्ट निगेटिव आने के अगले दिन मां की डिलवरी कराई गई और बच्चे की छह घण्टे बाद ही जांच कराई तो उसे कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर कीर्ति कहती हैं कि “बच्चे में हाई वायरल लोड के साथ कोरोना वायरस मौजूद है। अभी बच्चा अस्पताल में भर्ती है।”