तस्वीर: Indian Express

राहुल मिश्रा

केंद्र सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन को 4 मई से 2 हफ्ते के लिए और आगे बढ़ा दिया है यह तीसरा मौका है जब लॉकडाउन को बढ़ाया गया है। अब 17 मई तक देशभर में लॉकडाउन रहेगा। हालांकि इस लॉकडाउन में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने जिले के हिसाब से जोखिम का आकलन किया गया है जिसके आधार पर जिलों को ऑरेंज रेड एवं ग्रीन जोन में बांटा गया है। ग्रीन व ऑरेंज ज़ोन के तहत आने वाले जिलों में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों की अनुमति होगी,लोगों की आवाजाही और 50 फीसदी छमता के साथ बसों का भी परिचालन किया जा सकेगा।माल और मार्केट कॉप्लेक्स आदि को छोड़कर अन्य सभी दुकानों को खोलने की भी अनुमति दी गई है हालांकि रेड ज़ोन में पहले की तरह पाबंदी जारी रहेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड-19 के आधार पर देश भर में 130 जिलों को रेड जोन में 284 जिलों को ऑरेंज में और 319 को ग्रीन जोन में रखा है। दिल्ली मुंबई पुणे सहित अधिकतर बड़े शहरों को रेड ज़ोन में रखा गया है।

केंद्र ने अपने आदेश में कहा है कि हवाई यात्रा,रेल यात्रा अंतर्राज्यीय बस परिवहन और मेट्रो रेल की सेवाएं पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे। शिक्षण संस्थान,धार्मिक स्थल माल, होटल सिनेमाघर आदि सभी क्षेत्र अभी बंद रहेंगे गैर जरूरी गतिविधियों के लोगों की आवाजाही पर शाम 7:00 से सुबह 7:00 तक पूरी तरह से रोक रहेगी। 65 साल से अधिक उम्र के लोगों और 10 साल से कम उम्र के बच्चों को घर में ही रहना होगा चिकित्सा या बहुत जरूरी होने पर ही उन्हें बाहर निकलने की अनुमति दी जाएगी उन बंदी के कारण जहां लोग घरों में बेकार बैठे हैं वहीं पूर्ण बंदी का देश की अर्थव्यवस्था पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ने वाला है। पूर्ण बंदी के कारण जहां लोग घरों में बेकार बैठे हैं वहीं पूर्ण बंदी का देश की अर्थव्यवस्था पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े से बड़ा व्यापारी और उद्योगपति पूर्ण बंदी की मार झेल रहा है।

सरकार ने अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने हेतु रियायत पहले से अधिक दी हैं। केंद्र सरकार के द्वारा दी जा रही यह रियायत इस बात का संकेत है कि सरकार के द्वारा कोशिश की जा रही है ताकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके अभी हाल ही के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में उन्होंने अपने सभी सहयोगियों को संदेश किया था कि कोई भी निवेश प्रस्तावों हो उस पर समयबद्ध तरीके से फैसला होना चाहिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्तर पर इस फैसले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कोविड-19 महामारी के कारण पूरे विश्व में एक अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। चीन में निवेश करने वाली कंपनियां अब अपना एक विकल्प तलाश कर रही हैं इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का एक स्पष्ट सन्देश अपने मंत्रिमंडल के साथियों को देना मिल का पत्थर साबित हो सकता है इस बैठक में हर मंत्रालय को बताया गया है कि निवेश संवर्धन, औद्योगिक विकास की राह में जो भी रोड़ा हो उसे समय बद्ध तरीके से हटाने की क्षमता बढ़ानी होगी बैठक में वित्त मंत्री गृह मंत्री वाणिज्य व उद्योग मंत्री और वित्त राज्य मंत्री भारत सरकार के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

कोविड-19 महामारी के कारण पिछले 1 महीने से हमारे देश की अर्थव्यवस्था ठप पड़ी हुई है देशभर में रेल सेवा, हवाई सेवा सभी कारखाने बंद पड़े हैं मजदूरों का पलायन हो रहा है इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सबसे जरूरी तो यह है कि वह आपस में ताल मेल बनाए रखें तथा अपने सभी योजनाओं की केंद्रबिंदु पर मजदूरों , किसानों व बेरोजगार युवाओं को रखें और अपने सामाजिक सुरक्षा के तंत्र को मजबूत करे। कोविड-19 महामारी के कारण हमारे देश की अर्थव्यवस्था को जो क्षति पहुंची है उसे पटरी पर लाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों को मिलकर साथ में काम करना होगा और इसके लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर चिंतन जारी है और आने वाले समय में चिंतन का लाभ मिलने की भी संभावना है। चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला पड़ रहा है अंतरराष्ट्रीय कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत को देख रही है और यही सही समय है कि हमें अपने एफडीआई के नियमों को नरम करना चाहिए जिससे भारत समय का लाभ लेने में सफल रहे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती से पटरी पर लाने के लिए भारत सरकार को उदारता दिखानी ही होगी और कुछ रियायते भी विदेशी निवेश को देनी पड़ेगी।

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