स्रोत : ANI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन के ग्रैंड फिनाले को संबोधित किया। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 को लेकर छात्रों से कहा कि ये सिर्फ एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं है , बल्कि 130 करोड़ से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब भी है।

प्रधानमंत्री के भाषण की मुख्य बातें-

1. आप एक से बढ़कर एक समाधान पर काम कर रहे हैं। देश के सामने जो चुनौतियां हैं, ये उनका समाधान तो देते ही हैं, डाटा डिजिटलजेशन और हाई-टेक भविष्य को लेकर भारत की महत्वाकांक्षाओं को भी मज़बूत करते हैं। हमें हमेशा से गर्व रहा है कि बीती सदियों में हमने दुनिया को एक से बढ़कर एक बेहतरीन साइंटिस्ट, बेहतरीन कामगर दिए हैं।

2. ऑनलाइन एजुकेशन के लिए नए संसाधनों का निर्माण हो या फिर स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसे ये अभियान, प्रयास यही है कि भारत की शिक्षा और आधुनिक बने, मॉडर्न बने, यहां के टैलेंट को पूरा अवसर मिले। इसी कड़ी में कुछ दिन पहले देश की नई शिक्षा नीति का ऐलान किया गया है। ये पॉलिसी, 21वीं सदी के नौजवानों की सोच, उनकी जरूरतें, उनकी आशाओं-अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को देखते हुए बनाई गई है।

3. आप भी अपने आस-पास देखते होंगे, आज भी अनेक बच्चों को लगता है कि उनको एक ऐसे विषय के आधार पर जज किया जाता है, जिसमें उसका इंटरेस्ट ही नहीं है। मां-बाप का, रिश्तेदारों का, दोस्तों का प्रेशर होता है तो वो दूसरों द्वारा चुने गए सबजेक्ट्स पढ़ने लगते हैं। इस अप्रोच ने देश को एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी दी है, जो पढ़ी-लिखी तो है, लेकिन जो उसने पढ़ा है उसमें से अधिकांश, उसके काम नहीं आता। डिग्रियों के अंबार के बाद भी वो अपने आप में एक अधूरापन महसूस करता है।

4. 21 वीं सदी ज्ञान का युग है। यह फोकस बढ़ाने का समय है- सीखने, रिसर्च और इंनवोशन पर। यह वही है जो भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 करती है।

5. हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, हमारे देश के महान शिक्षाविद बाबा साहेब आंबेडकर कहते थे कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो सभी की पहुंच में हो, सभी के लिए सुलभ हो। ये शिक्षा नीति, उनके इस विचार को भी समर्पित है।

6. हमारे देश में भाषा- हमेशा से एक संवेदनशील विषय रही है। इसी एक बड़ी वजह ये है कि हमारे यहां स्थानीय भाषा को अपने हाल पर ही छोड़ दिया गया, उसे पनपने और आगे बढ़ने का मौका बहुत कम मिला। अब एजुकेशन पॉलिसी में जो बदलाव लाए गए हैं, उससे भारत की भाषाएं आगे बढ़ेंगी, उनका और विकास होगा। ये भारत के ज्ञान को तो बढ़ाएंगी ही, भारत की एकता को भी बढ़ाएंगी।

7. आज GDP के आधार पर विश्व के टॉप 20 देशों की लिस्ट देखें तो ज्यादातर देश अपनी गृहभाषा, मातृभाषा में ही शिक्षा देते हैं। ये देश अपने देश में युवाओं की सोच और समझ को अपनी भाषा में विकसित करते हैं और दुनिया के साथ संवाद के लिए दूसरी भाषाओं पर भी बल देते हैं। एक ओर जहां स्थानीय लोक कलाओं और विद्याओं, शास्त्रीय कला और ज्ञान को स्वभाविक स्थान देने की बात है तो वहीं विश्व स्तरीय संस्थान को भारत में खोलने का आमंत्रण भी है।

8. स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के माध्यम से भी बीते सालों में अद्भुत इंनवोशन देश को मिले हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि इस हैकेथॉन के बाद भी आप सभी युवा साथी, देश की जरूरतों को समझते हुए, देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, नए-नए समाधान पर काम करते रहेंगे।

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