अमेरिका में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस से हुई 3176 मौतों के बाद मरने वाले की कुल संख्या 50,000 पार हो गई हैं। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक अमेरिका में सिर्फ 10 दिनों में ही यह आंकड़ा दोगुना हो गया है। वहीं 890,000 से ज्यादा अमेरिकी इस वायरस से संक्रमित हैं। हालांकि कई लोग यह दावा कर रहे हैं कि यह संख्या इससे ज्यादा हो सकती है, क्योंकि टेस्ट काफी कम हो रहे हैं और स्वास्थ्य समस्यायों का भी काफी अभाव है।

अभी तक हुई कुल मौतों में से करीब 40 % मौतें सिर्फ न्यूयॉर्क प्रांत में हुई है। पूरे विश्व में कोरोना वायरस से सबसे अधिक मौतें अमेरिका में ही हुई है। इसके बावजूद भी अमेरिका के कई इलाकों को खोला जा रहा है।

शुक्रवार को जॉर्जिया ,अलास्का और कई प्रांत में व्यापारिक प्रतिष्ठान भी खुले रहे हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए अनिश्चितकालिन लॉकडाउन ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को काफी चोट पहुंचाई है जिसके लिए कई लोग बेरोजगारी भत्ते की मांग कर रहे हैं। वहीं, कुछ दिन पहले ही यहां लोगों ने लॉकडाउन का विरोध करना शुरू कर दिया था और सड़क पर निकल आए थे।
इसके बाद कई प्रांत के गवर्नरों ने लॉकडॉउन में थोड़ी ढील दी और कई तरह के आर्थिक क्रियाकलाप करने की अनुमति दी।

हालांकि, कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लॉकडाउन में दी गई ढील को लेकर चेतावनी दी है और कहा है कि इससे संक्रमण काफी तेजी से फैल सकता है। इस संक्रमण के चलते मरने वालों की कुल संख्या 1950-53 के कोरिया युद्ध में मरने वाले अमेरिकी लोगों की संख्या से बहुत ज्यादा है। सिर्फ 3 महीने में ही यह संक्रमण पूरे अमेरिका में फैल गया है। विशेषज्ञ इसके पीछे अमेरिकी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और इसका कारण जांच में हुई देरी को बता रहे हैं। इस संक्रमण के कारण पहली मौत फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में किर्कलैंड में हुई थी।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस का पहला मामला चीन के वुहान शहर से सामने आया था। कई विशेषज्ञ वुहान के प्रतिबंधित मीट मार्केट को इसका स्त्रोत मान रहे हैं। इससे संक्रमित लोगों में खांसी, बुखार और सिर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वुहान शहर से फैला यह वायरस जल्दी ही पूरी दुनिया में फैल गया और अभी लाखों लोग इससे प्रभावित हो चुके हैं।

सुरक्षा कारणों की वजह से इस समय पूरी दुनिया के स्कूल , कॉलेज और तमाम भीड़ भाड़ वाली जगह को बंद कर दिया गया है। फैक्टरी और व्यापारिक प्रतिष्ठान के बंद होने के कारण कई देश इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा हैं।