स्रोत - गूगल

मरयम अली

3 मई को दुनिया भर में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, लेकिन क्या हकीक़त में प्रेस स्वतंत्र है? नहीं वर्तमान में,तो बिल्कुल नहीं और इसका उदाहरण हमें बीते दिनों बहुत देखने को मिला जब कोरोना वायरस के चलते देश में सांप्रदायिक तनाव को चलाने की भी भरपूर कोशिश की गई और कुछ जगह हमें इसका परिणाम भी देखने को मिला जिसमें धर्म पर की गई राजनीति साफ़ दिखाई दी और उसका शिकार बने दो समूह। हम पूरे मीडिया जगत को ग़लत नहीं कह सकते मगर अधिकतर हैं ख़ासकर मेन स्ट्रीम मीडिया का हमें बेहद नकारात्मक रूप देखने को मिला जिसकी शुरुआत कुछ सालों से अधिक बढ़ गई है। हमें पढ़ाया गया था कि पत्रकारिता का उद्देश्य जनता को जागरूक करना व उसके हितों की रक्षा करना होता है। दुर्भाग्यवश आज की पत्रकारिता का उद्देश्य जनता के हितों की रक्षा करना नहीं बल्कि सरकार की रक्षा करना हो गया है। ग़रीबों की आवाज़ सरकार तक एक पत्रकार ही सक्षम रूप से पहुंचा सकता है। लेकिन अगर वही सरकार के साथ हो जाए तो ग़रीब का जीवन इंसाफ की उम्मीद से दम तोड़ देता है। सरकार का विपक्ष से गठबंधन इतना हानिकारक नहीं होता जितना सरकार से पत्रकार का गठबंधन जनता पर भारी पड़ता है। समाज में सकारात्मकता लाने और भाई चारा बढ़ाने का उद्देश्य मीडिया की प्राथमिकता होनी चाहिए।
मीडिया और जनता दोनों को यह नहीं भूलना चाहिए कि – “मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना”

(लेखिका,दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा है)

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