भारत की एकता के मूलभूत आधार!
भारतवर्ष को इस बात को लेकर बार-बार कठघरे में खड़ा किया जाता रहा है कि क्या यह एक राष्ट्र है या फ़िर विभिन्न भौगोलिक...
ये रणबिजय, तुम फिलिम के किरदार नहीं, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी पर वर्षों का शोध हो!
प्रशांत सिंहइलाहाबाद यूनिवर्सिटी नाम ही काफी है अपने साहित्यिक इतिहास के लिए, लेकिन जब बात रुपहले पर्दे की आती है तो लोगों की...
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल: प्रगतिशीलता और साम्प्रदायिकता का विवाद
प्रगतिशीलता बड़ी ही परिवर्तनशील अवधारणा है। यह देश-काल सापेक्ष होती है। एक समाज में जो कुछ प्रगतिशीलता का चिह्न माना जाता है कोई आवश्यक...
तो शायरी भी चुराते हैं देश के मशहूर शायर मुनव्वर राणा!
रामाशीष यादवउर्दू शायरी व दिलकश अदा के लिये देश-दुनिया में मशहूर शायर मुनव्वर राणा पर अब तक शायरी के द्वारा सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप...
भारतीय राष्ट्र की अवधारणा
शिवम सिंह
'भारतीय इतिहास में इस्लाम का आगमन एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना थी। शुरू शुरू में ऐसा लगा कि उसकी मूल भावनाओं का...
भगत सिंह के विचारों को आत्मसात करना आसान नहीं!
राहुल कुमार दोषीभगत सिंह बोल गए हैं- "इश्क लिखना भी चाहूँ तो इंकलाब लिख जाता हूँ, इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे...
प्रकृति की ओर लौटने का वक्त
हम 21वीं शताब्दी के सबसे कठिन दौर में जी रहे हैं, जिसे हम आज अगर कोरोनयुग कहेें तो गलत नहीं होगा।
भारतीय ज्ञान परंपरा में...
आजादी के आन्दोलन में रेडियो का योगदान
सत्य व्रत त्रिपाठी1941 के नवम्बर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था, “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।” यह नारा...
सावरकर जयंती पर बीएचयू और जेएनयू की घटना का स्मरण
अनिमेष मिश्राकुछ दशक पहले शायद यह उम्मीद करना भी मुश्किल था कि सावरकर की जंयती पर भारत के प्रधानमंत्री उनके योगदान को याद करेंगे...
जड़ता बनाम चैतन्यता
अभिषेक पाण्डेय'जड़ता है जीवन की पीड़ा
निस-तरंग पाषाणी क्रीड़ा'जड़ता में स्थिरता है, चैतन्य उसका विरोधी गुण है जो जड़ता के प्रति विद्रोह है।...
























